Lonely night…

दिल बहुत उदास था
मैंने उनसे बात न की थी
हर रोज़ शाम-सवेरे कभी न कभी उनसे बात हो जाया करती थी
फिर आज क्या था जो मैं घबराया सा हुआ था
उसकी सुकून भरी आवाज़ आज कानों में कुछ और ही थी
ये एहसास तब हुआ जब रात को मैंने उनके दिल की बात सुनी
वो डर के साये में बैठी मेरा इंतज़ार कर रही थी
फिर बात हुई जैसे हर बार हुई थी
उसने दिल की जुबां से कुछ बोला और मैंने भी दिल से सुना
कुछ वो मुस्कुराई, फिर मैं मुस्कुराया
कुछ पल ऐसे भी थे जब मुस्कुराना भूल सा गया था
शायद उसकी मुस्कराहट हम दोनों की ख़ुशी बयाँ कर रही थी
वक़्त कुछ और गुज़रा, रात कुछ और गहरी हुई
अब उसको जाना था, शायद यही उसका बहाना था
वो हर बार की तरह बिन पीछे मुड़े बिन देखे चली गयी
और मैं हर बार की तरह अभी भी रात की गोद में सिर झुकाये इस बात पर विचार कर रहा हूँ कि इस रात का हमसफ़र बन जाऊँ क्योंकि ये रात मेरी तरह अकेली थी…


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