वक़्त तो दरिया है, बह जाता है…

अगर तुम कह देते जो कहना चाहते

तो बात यहाँ तक न पहुँचती

एक दुसरे की मौजूदगी

हमें यूँ बेचैन न करती

ठुकरा दिया होता तुमने अपने अहम् को

हमने अपने डर को

तो आज मैं लिख न रहा होता

और तुम पढ़ न रहे होते…


Leave a comment