इंतजार

इस बंद चारागाह में इंतजार करना ही अब मेरी किस्मत है,

मैं कैद नहीं हूँ, पर ख्यालों के पंख अब कट चुके हैं

न कोई रौशनी, न कोई आहट, बस दूर क़दमों की चहलपहल

आँखें बंद करता हूँ, तो खुद को आसमान में उड़ता हुआ महसूस करता हूँ

सिर्फ बादलों का सफ़ेद धुआं, इतना सफ़ेद की आँखें खोले रखना मुश्किल है

आँखें खुले तो फिर अँधेरे में, बंद हो तो रौशनी का सागर है

नज़रें तलाश कर रही हैं किसीको, शायद उसी को

पर वो तो हकीक़त में है, ये तो ख्वाबो-ख्याल है

पर मुझे लगा था कि मैं उड़ नहीं सकता, ख्वाब नहीं देख सकता

क्या मैं गलत हूँ, क्या मैं अपने मन कि साजिश में गिरफ्तार हूँ

दरवाज़े पर फिर कोई आहट हुई है, कोई है

वो दरवाज़ा खटखटा क्यों नहीं रहा, मुझे मालूम है वो वहां है

दरवाज़े के नीचे से पीपती हुई रौशनी कमरे में आ रही है

अभी इसी उलझन में हूँ कि दरवाज़ा खोलूं या नहीं

फिर आँखें बंद कर लेता हूँ, लेकिन अब बादल छट चुके हैं

सामने भीड़ है, कोई चेहरा नहीं, चेहरे धुंधले हैं

कोई कुछ बोल नहीं रहा, बस एक ही जगह खड़े हैं

हकीक़त और ख्वाब में कोई फर्क नहीं रहा

आखिर मन किसे ढून्ढ रहा है, कौन है जो वहां है पर नहीं है

धड़कने बढ़ गयी हैं, डर ने मुझको काबू कर लिया है

ख्वाब अब मिट चुका है, वहां भी अँधेरा है

मैं झट से भागा, पर वहां कोई नहीं है

दूर एक बल्ब जल रहा है, मैंने घूर कर देखा उसे

वो रौशनी बहुत अच्छी लगी, फिर कोई आ रहा है

मैं अन्दर आ गया हूँ, अब पहले से ज्यादा अँधेरा है

पहले चारदीवारी महसूस हो रही थी, अब सब काला है

अब दीवारें भी मुझसे दूर हो गयी हैं, कुछ नहीं है पास मेरे

ये चारागाह अब कैद लगने लगी है

इंतजार करता हूँ, सुबह होने का

पर कहीं आँखें न बंद हो जाए, फिर कोई आता भी तो नहीं यहाँ पे

जो सुबह होने पर हाथ लगाये, और नींद से जगाये

मैं इंतजार कर रहा हूँ, इस चारागाह कि कैद में

सुबह होने का, मेरे जागने का

मैं देखूंगा कौन है जो रातों में दरवाज़े पर आहट देकर मजाक करता है

अभी क्या वक़्त हुआ है, रात ही है न, ख्वाब तो नहीं

वक़्त भी नाराज़ है, हमसे कोई रिश्ता नहीं रखता

दूर रहता है, महसूस करना मुश्किल हो गया है

अब आदत हो गई है, ये रात भी हर रात है

अब ज़िन्दगी ही रात है, सुबह होता नहीं है

दिन एक ख्वाब है, याद नहीं कब इस कमरे से बाहर निकला था

निकला था तो क्या मैं निकला था या कोई और

मैं तो कब से कैद हूँ, इंतजार में रात में किसी के आने का

दरवाज़ा खुल जाए तो मैं मुक्त हो जाऊं

इस कैद से उस दुनिया की कैद में जहाँ हर कोई वक़्त का गुलाम है

आसमान देखना है, तारे गिनने है, चाँद ढूँढना है

किसी के साथ, अकेले तो ख्वाब भी देख लेता हूँ

इंतजार ख़तम नहीं हो रहा, रात बहुत लम्बी है

सवेरा गुमशुदा है, तलाश जारी है

मैं आँखें बंद कर लेता हूँ, सुबह होगी तो जगाना

मैं इंतजार कर रहा हूँ, इस कैद में 

अँधेरे में, उमीदों में, ख्वाबों में…


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