खामोश निगाहें…

जब-जब मेरी चाहत ने उससे जवाब माँगा

उसने ख़ामोशी का दामन थाम लिया

न ही मेरी ख़ुशी का हिस्सा बन सकती है

और न ही मेरे ग़म का कारण बनना चाहती है

पर उसकी ख़ुशी किस बात में हैं, वो बताती नहीं

हम भी उसकी ख़ुशी की तलाश में एक हिस्सा बन

अपना एक छोटा सा आशियाना सजा लेते हैं

पर वो डरती है कि करीब आकर दूर जाना बहुत मुश्किल होता है

शायद इसीलिए वो कुछ न कहती है न ही कुछ बताती है

बस उसकी खामोश निगाहें एक सवाल पूछ जाती है…


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